ARCHIVES
VOL. 9, ISSUE 4 (2023)
प्रेमचंद के कथादृसाहित्य में व्यक्त स्त्री-मुक्ति के स्वर
Authors
अमीनुद्दीन
Abstract
हिंदी कथा-साहित्य में प्रेमचंद एक लेखक ही नहीं बल्कि एक युग-प्रवर्तक के रूप में पहचाने जाते हैं। उनका साहित्य भारतीय संस्कृति की पहचान व धरोहर है। उन्होंने जितनी गंभीरता से समाज की समस्याओं पर अपनी लेखनी चलाई है, उसी गंभीरता के साथ स्त्री की समस्याओं को भी चित्रित किया है। प्रेमचंद युग से पूर्व के कथाकारों ने स्त्री को आदर्शवादी स्वरूप में देखने का प्रयास किया जिसमें सुधारवादी दृष्टिकोण तो था, किंतु स्त्री की छवि आडम्बरपूर्ण और बोझिल सी प्रतीत होने लगी थी। अतः प्रेमचंद ने स्त्री की आत्मा को उसकी तमाम अच्छाइयों और बुराइयों के साथ पहली बार यथार्थवादी ढंग से चित्रित करने का प्रयत्न किया।
Download
Pages:25-27
How to cite this article:
अमीनुद्दीन "प्रेमचंद के कथादृसाहित्य में व्यक्त स्त्री-मुक्ति के स्वर". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 4, 2023, Pages 25-27
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

