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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 9, ISSUE 4 (2023)
ओमप्रकाश वाल्मीकि कहानियों में चित्रित आत्मसंघर्ष का स्वरूप (‘सलाम’ कहानी-संग्रह के परिप्रेक्ष्य में)
Authors
डॉ. सदानन्द वर्मा
Abstract
ओमप्रकाश वाल्मीकि दलित साहित्य के प्रमुख एवं अग्रणीय रचनाकार हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से दलित समाज और उसमें घटित होने वाली परिस्थितियों का विश्लेषण बड़े ही बारीक़ दृष्टिकोण से किया है। वे इस समाज में रोजमर्रा के जीवन में घटित होने वाली घटनाओं के न केवल द्रष्टा ही रहे बल्कि भोक्ता भी थे। यही कारण है कि उनकी रचनाओं में उनके जीवन की उन सभी विषंगतियों, जिजीविषाओं एवं आतंरिक समस्याओं का पूंज दिखाई पड़ता है जिसको उन्होंने जिया और उसके अच्छे-बुरे परिणामों का अनुभव भी किया। उनकी लेखनी में आने वाली प्रखरता, आक्रोश एवं प्रतिरोध का स्वरूप इस बात का द्योतक है जो उनकी आतंरिक पीड़ा और उससे मुक्ति की चाह के रूप में दिखाई पड़ती है। उनकी रचनाएँ जहाँ एक ओर सामाजिक पीड़ा, गरीबी, बेरोजगारी, आपसी कलह, अंतर्द्वंद्व, ऊँच-नीच व छुआ-छूत की पीड़ा को रेखांकित करती है तो वहीं दूसरी ओर उसमें आत्मसंघर्ष, अंतर्विरोध, जिजीविषा, समानता, बंधुत्व व भाई-चारे की भावना का निरूपण भी देखने को मिलता है। निश्चित तौर पर लेखक ने अपनी रचनाओं के माध्यम से जिस दलित समाज, उसकी पीड़ा एवं संवेदना को प्रस्तुत करने की कोशिश की है वह उस समाज की यथार्थ स्थिति को द्रष्टव्य करता है। यह सत्य है कि ओमप्रकाश वाल्मीकि को इसकी प्रेरणा फुले-अम्बेडकरी चिन्तन से प्राप्त हुई है जिसकी मुखरता हम अम्बेडकरवादी सिद्धांतों एवं विचारों में पाते हैं। लेखक ने भी इसी विचारधारा को आधार बनाकर अपनी रचनाओं में उन चेतानाप्रद पात्रों का सृजन किया है जो एक ओर तो अपनी अमानवीय दशा एवं सामाजिक पीड़ा के दंश को झेलते हुए नजर आते हैं; वहीं दूसरी ओर वे सामाजिक कुरीतियों, रुढ़िवादी व ब्राह्मणवादी सोच को तोड़ते हुए एक ऐसे समाज की नीव तैयार करने की कोशिश करते हैं; जहाँ प्रत्येक व्यक्ति की पहचान ‘मनुष्य’ के रूप में हो सके तथा उसके साथ मनुष्यता का व्यवहार किया जा सके; सबके लिए समान न्याय की बात की जाय तथा सबको अपने अधिकार स्वेच्छा से प्राप्त हो सके। जो किसी भी सुदृढ़ और व्यवस्थित लोकतंत्र के मानको में शामिल होती है।
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Pages:32-35
How to cite this article:
डॉ. सदानन्द वर्मा "ओमप्रकाश वाल्मीकि कहानियों में चित्रित आत्मसंघर्ष का स्वरूप (‘सलाम’ कहानी-संग्रह के परिप्रेक्ष्य में)". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 4, 2023, Pages 32-35
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