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VOL. 9, ISSUE 5 (2023)
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कविता में राष्ट्र चेतना: स्वरूप, अभिव्यक्ति और समकालीन प्रासंगिकता का अध्ययन
Authors
सीमा कुमारी मीणा
Abstract
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हिंदी साहित्य के ऐसे प्रमुख कवि हैं, जिनकी कविताओं में राष्ट्र चेतना अत्यंत सशक्त और प्रभावशाली रूप में अभिव्यक्त हुई है। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य दिनकर की कविताओं में निहित राष्ट्रवादी विचारधारा, उसकी अभिव्यक्ति और उसके सामाजिक प्रभाव का विश्लेषण करना है। दिनकर का काव्य केवल साहित्यिक सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें राष्ट्रीय भावना, जनजागरण और सामाजिक परिवर्तन की प्रेरणा स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
दिनकर की कविताएँ उस समय की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों से गहराई से प्रभावित हैं, विशेषकर स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय पुनर्जागरण के दौर से। उन्होंने अपने काव्य के माध्यम से देशभक्ति, स्वतंत्रता, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक गौरव के विचारों को प्रमुखता दी। उनकी रचनाओं में राष्ट्र के प्रति समर्पण और कर्तव्यबोध की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जो पाठकों को प्रेरित करती है।
दिनकर की काव्य-शैली ओजपूर्ण और प्रेरणात्मक है, जो उनके राष्ट्रवादी विचारों को और अधिक प्रभावशाली बनाती है। उन्होंने ऐतिहासिक और पौराणिक संदर्भों का प्रयोग करके राष्ट्र चेतना को सुदृढ़ किया और समाज को जागरूक करने का प्रयास किया। दिनकर की कविताएँ भारतीय राष्ट्रवाद की सशक्त अभिव्यक्ति हैं, जो न केवल उनके समय में प्रासंगिक थीं, बल्कि आज भी सामाजिक और राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
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Pages:56-59
How to cite this article:
सीमा कुमारी मीणा "रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कविता में राष्ट्र चेतना: स्वरूप, अभिव्यक्ति और समकालीन प्रासंगिकता का अध्ययन". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 5, 2023, Pages 56-59
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