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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 9, ISSUE 5 (2023)
आधुनिक हिन्दी उपन्यासों मे मनोवैज्ञानिकता
Authors
रीना मेवाड़ा, तबस्सुम ख़ान
Abstract
मनोवैज्ञानिक उपन्यासों सामान्य व्यक्ति की असामान्य मनोदशा और आचारों का आंकलन होता है, साथ ही असामान्य व्यक्ति की असामान्य अवस्था भी चित्रित होती है। आधुनिक नर-नारियों के बीच प्राचीन सामाजिक सम्बन्धों में दरारें पड़ने लगी हैं इन्हीं का नग्न चित्र मनोवैज्ञानिक उपन्यासों में मिलता है। इसका परिणाम यह हुआ कि उपन्यास साहित्य संकीर्ण से संकीणंतर होता गया। उपन्यासकार समाज को छोड़कर उसके अवचेतन मन के कार्यकलाप का विश्लेषण करने लगा। इस प्रवृत्ति से युक्त उपन्यासों के पात्र समाज में नहीं, स्वयं में जीते हैं। व्यक्तिगत कुंठाएँ प्रमुख हो जाती हैं। ऐसे आत्मपरक उपन्यासों में अज्ञेय के ‘‘नदी के द्वीप’’ और ‘‘अपने-अपने अजनबी’’ की गणना है। राजेन्द्र यादव के ‘‘अनदेखें अनजान पुल’’ ;1963द्ध में कुरुपता से उत्पन्न हीनभावना का इतिहास है। धर्मवीर भारती के ‘‘गुनाहों का देवता’’, ‘‘सूरज का सातवाँ घोडा’’, देवराज के ‘‘पथ की खोज’’, ‘‘अजय की डायरी’’, मोहनराकेश का ‘‘अँधेरे बन्द कमरे’’ ;1961द्ध निर्मल वर्मा के ‘‘वे दिन’’, कमलेष्वर का ‘‘डाक बँगला’’, राजकमल चौधरी का ‘‘मछली मरी हुई’’, अमरकान्त का ‘‘कटीली राह के फूल’’, द्वारिका प्रसाद का ‘‘मम्मी बिगडेगी’’, नरेश मेहता का ‘‘डूबते मस्तूल’’, उषाप्रियंवदा का ‘‘झुकोगी नहीं राधिका’’, मेहरुन्निसा परवेज़ का ‘‘आँखों की दहलीज’’ और कृष्णा-सोबती का ‘‘सूरजमुखी अँधेरे के’’, आदि उपन्यास मनोविज्ञान द्वन्द्व व मनोविश्लेषण पर आधारित है।
मनोवैज्ञानिक उपन्यास अपनी वस्तु और शैली में अन्य उपन्यासों से बहुत भिन्न होते है। मनोवैज्ञानिक उपन्यास मूलतरू मनोविश्लेषण पर आधारित है। व्यक्ति मानस का विश्लेषण, उसके अचंतन मन की छानबीन, उसके मानसिक अंतर्द्वन्द्वों और भावों का प्रकटीकरण, उसके मन के अज्ञान कोनों के भीतर दमित कामनाओं एवं पशुवृत्तियों का उद्घाटन मनोवैज्ञानिक उपन्यासों का प्रमुख विषय है? हिन्दी में सबसे पहले मनोविज्ञान के कुछ तत्व सच्चे रूप में प्रेमचन्द के उपन्यासों में ही मिलते हैं। उन के वरदान, प्रतिज्ञा, सेवासदन, प्रेमाश्रम, निर्मला, रंगभूमि, कायाकल्प, कर्मभूमि, गोदान आदि उपन्यासों में भी मनोविज्ञान का अंश झलकता है।

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Pages:9-12
How to cite this article:
रीना मेवाड़ा, तबस्सुम ख़ान "आधुनिक हिन्दी उपन्यासों मे मनोवैज्ञानिकता". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 5, 2023, Pages 9-12
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