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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 9, ISSUE 5 (2023)
भारतेंदु का उदय और प्रभाव
Authors
सुषमा सिन्हा
Abstract
सन 1850 (संवत् 1907) मैं भारतेंदु हरिश्चंद्र का जन्म हुआ। भारतेंदु केवल 35 वर्ष जीवित रहे। माघ कृष्ण पक्ष संवत 1942 (सन् 1885) में इनकी मृत्यु हो गई। इतने अल्प समय में शायद ही किसी अन्य व्यक्ति ने इतना बड़ा साहित्य कार्य किया। इनकी अपूर्व प्रतिभा ने हिंदी भाषा और हिंदी साहित्य दोनों को प्रभावित किया। केवल 15 वर्ष की अवस्था में इनका परिचय बंगाल के उठते हुए साहित्य से हुआ।। 17 वर्ष की अवस्था में उन्होंनेष्कवि वचन सुधाश्नाम की एक पत्रिका निकाली। सन 1873 में “हरिश्चंद्र मैगजीन” और फिर दूसरी पत्रिका निकली। इस पत्रिका में हरिश्चंद्र का परिमार्जित हिंदी दर्शन पहली बार प्रकाशित हुआ। भारतेंदु ने अनेक नाटकों की रचना की और वास्तव में इस क्षेत्र में उनकी प्रतिभा का सर्वाेत्तम उपयोग हुआ। नाटकों के माध्यम से ही उन्होंने देश भक्ति और भगवत भक्ति का संदेश घर-घर पहुंचाया। ईसा के 19वीं शताब्दी संसार के इतिहास को नई दिशा में मोड़ने वाली शताब्दी रही है। इसी स्थिति में एक नवीन विचारधारा का जन्म हुआ जिसे राष्ट्रीयता कहते हैं। राष्ट्रीयता भारतवर्ष के लिए नवीन विष्वास थी। धीरे-धीरे ख्वाबों में नाटकों में उपन्यासों में तथा अन्य साहित्यिक रचनाओं में भारतवर्ष की पराधीनता और भारत का शोषण इस प्रकार प्रकट होने लगा, जिसमें साहित्यकारों के हृदय की व्यथा बड़ी व्याकुलता के साथ प्रकट हुई। भारत वासियों में अपने देश के प्रति प्रेम का भाव जागृत हुआ स्वाभिमान की मात्रा बढ़ती गई। काव्य और साहित्य क्षेत्र में से भारतेंदु जैसा सुयोग्यनेता प्राप्त हुआ। अकृत्रिम सहृदयता, निरंतर जागरूक दानशीलता और निश्छल सहज भाव ने उन्हें अपने युग का श्रेष्ठ साहित्यिक नेता बना दिया।
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Pages:6-8
How to cite this article:
सुषमा सिन्हा "भारतेंदु का उदय और प्रभाव". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 5, 2023, Pages 6-8
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