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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 9, ISSUE 5 (2023)
अज्ञेयः यात्राओं की अन्तर्यात्रा
Authors
शुभांगी श्रीवास्तव
Abstract
बीसवीं सदी में हिन्दी के यायावर बने अज्ञेय ने देश-विदेश की जितनी यात्राएं की और जितना साहित्य लिखा सभी में उनकी समृद्ध संवेदनात्मक प्रतिभा का स्वरूप स्पष्ट दिखाई देता है। अज्ञेय छायावादोŸार दौर के महत्वपूर्ण रचनाकार है। उन्होंने उपन्यास लिखे, कविताएं लिखी, आलोचना लिखी और यात्रा साहित्य भी लिखे। अज्ञेय का यात्रा साहित्य उनके रचनात्मक व्यक्तित्व का अभिन्न अंग है। अज्ञेय के व्यक्तित्व को उनकी यात्रा साहित्य के अध्ययन के बिना जाना नहीं जा सकता है। उन्होंने अपनी यात्राओं का चुनाव किया। उनको भारत के सांस्कृतिक इतिहास ने बहुत आकृष्ट किया और वे अपने लेखकीय जीवन की गतिशीलता के लिए अनुभवों के संवर्धन के लिए विभिन्न संस्कृतियों के प्रति अपनी जिज्ञासा के द्वारा यात्राओं की ओर गये। उन्होंने ऐसा जीवन चुना जिसमें एक जगह-टिक कर रहना नहीं था और संयोग भी ऐसा था कि अज्ञेय को इस प्रकार की गतिशीलता मिलती चली गयी। इस आलेख में इसी विषय पर चर्चा की गयी है।
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Pages:18-20
How to cite this article:
शुभांगी श्रीवास्तव "अज्ञेयः यात्राओं की अन्तर्यात्रा". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 5, 2023, Pages 18-20
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