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VOL. 9, ISSUE 6 (2023)
गोदानः कृषक जीवन की महाकाव्यात्मक त्रासदी
Authors
Umashankar Ray
Abstract
गोदान सन 1936 मे ंप्रकाशित प्रेमचन्द का कृषक समस्या पर आधृत महाकाव्यात्मक उपन्यास है जो कि उनकी उपन्यास कला का चरमोत्कर्ष है। साहित्य को समाज से जोड़ने का काम प्रेमचन्द ने किया। उन्होनंे किसानों की समस्याओं को अनेक प्रकार से रूपायित किया तथा देश के अन्नदाता कीे दिन-हीन परिस्थिति को ऐसे यर्थाथ भावो ंसे रचा की, पाठक के सामने विचारणीय परिस्थिति खड़ी हो गई। किसान का शोषण कितने मुहाने पर और किस प्रकार होता है इसका चित्रण ‘गोदान‘ में होरी की कथा के माध्यम से किया गया है। ‘गोदान मे ंशोषण के जिन तरीकों को बताया गया है, उसका स्वरूप आज की वर्तमान परिस्थिति में भी वैसा हीं आभाषित होता है। कृषक समस्या का जैसा चित्रण गोदान मे ंमिलता है, वैसा अन्यत्र दुर्लभ है।
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Pages:1-3
How to cite this article:
Umashankar Ray "गोदानः कृषक जीवन की महाकाव्यात्मक त्रासदी". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 6, 2023, Pages 1-3
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