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VOL. 10, ISSUE 1 (2024)
आलोचना में दर्शन का शुक्ल पक्ष
Authors
डॉ. अनिल कुमार
Abstract
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल हिन्दी साहित्य के एक मूर्धन्य आलोचक और इतिहासकार के रूप में जाने जाते हैं लेकिन उनकी दृष्टि में दर्शन एक रीढ़ की तरह है। आधुनिक काल के वैज्ञानिक दौर में उभर रहे नवीन चेतना को दर्शन की पूर्वप्रवाहित धारा से सहज ही टकराना पड़ा। रामचंद्र शुक्ल भी टकराते हैं। वे विज्ञान तथा विकासवाद को दर्शन की शर्त पर ही स्वीकार करते हैं और दर्शन को विज्ञान की शर्त पर। यही कारण है कि वे जगत् को मिथ्या नहीं सत्य मानते हैं। शुक्लजी के चिंतन के केन्द्र में किसान हैं, समाज हैं, देश है और देश की आजादी है। अपनी इस केन्द्रियता के कारण ही वे विज्ञान, दर्शन, साहित्य सब जगह मनुष्य तथा उसकी स्वतंत्रता की खोज करते हैं। आचार्य शुक्ल की आलोचना विज्ञान और दर्शन के द्वंद्व की परिणति है। प्रस्तुत शोध आलेख में इसे विस्तार से रेखांकित करने की कोशिश की गई है।
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Pages:21-24
How to cite this article:
डॉ. अनिल कुमार "आलोचना में दर्शन का शुक्ल पक्ष". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 1, 2024, Pages 21-24
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