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VOL. 10, ISSUE 1 (2024)
इक्कीसवीं सदी (2000-2020) के उपन्यासों में किसान जीवन का अध्ययन
Authors
इस्मारिका सिंह मौर्या, डा0 सन्तोष पाण्डेय
Abstract
इक्कीसवीं सदी (2000-2020) के उपन्यासों में किसानों की आर्थिक एंव सामाजिक स्थिति का यथार्थ चित्रण किया गया है । सामाजिक यथार्थ को प्रतिबिंबित करने का माध्यम रहे उपन्यासकारों ने अपने अनुभव एवं देश काल वातावरण का अध्ययन कर अपने उपन्यासों में किसान जीवन की समस्याओं, संघर्षाे और विभिन्न परिस्थितियों को प्रमुखता से दिखाया है । 2000-2020 के बीच की अवधि में भारतीय समाज एवं अर्थव्यवस्था में महतवपूर्ण परिवर्तन हुए हैं ।इन दो दशक में एक तरफ जहॉं शहरीकरण और औद्योगिकी का विकास हुआ वहीं दूसरी तरफ किसानों की स्थिति चुनौतीपूर्ण रही । इस समय के हिन्दी उपन्यासों में भूमि संकट, सामाजिक भेदभाव, आर्थिक कठिनाइयों के साथ ही साथ किसानों की दयनीय स्थिति का भी वर्णन किया गया है ।हिन्दी उपन्यास न केवल किसानों की दुर्दशा को समझने का माध्यम बना अपितु उनके जीवन में हो रहे आर्थिक, सामाजिक एंव सांस्कृतिक बदलाव को भी प्रस्तुत किया । किसानों का जीवन प्रारम्भ से अंत तक अनेक झंझावातों से घिरा रहता है । परन्तु इक्कीसवीं सदी के हिन्दी उपन्यासों में किसानों की स्थिति में सुधार के लिए प्रखर शब्द दिखाई देते हैं । उनकी समस्यायों पर विस्तृत वर्णन देखने को मिलता है ।
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Pages:25-27
How to cite this article:
इस्मारिका सिंह मौर्या, डा0 सन्तोष पाण्डेय "इक्कीसवीं सदी (2000-2020) के उपन्यासों में किसान जीवन का अध्ययन". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 1, 2024, Pages 25-27
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