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VOL. 10, ISSUE 1 (2024)
डॉ. बच्चन सिंह की साहित्येतिहास दृष्टि
Authors
शुभी गुर्जर, ममता गोयल
Abstract
हिन्दी साहित्येहास लेखन परंपरा सन् 1839 में तासी से आरंभ होती है, और वर्तमान समय तक आते-आते इसमें अनेक ग्रन्थ जुड़ जाने से समृद्धता आ गयी है। प्रस्तुत लेख में डॉ. बच्चन सिंह की साहित्येतिहास दृश्टि को केन्द्र में रखा गया है। जिनका ग्रन्थ उदारीकरण के दौर में सन् 1996 में आया। साहित्येतिहासकार जिस समय में साहित्येतिहास लेखन करता है उस समय के मूल्यांे का प्रभाव अतीत की घटनाओं पर भी अवश्यंभावी होता है। इस प्रकार कह सकते है कि केवल अतीत ही वर्तमान को प्रभावित नही ंकरता, वर्तमान भी अतीत को प्रभावित करता हुआ चलता है। इस प्रभाव के परिणामस्वरूप अतीत की घटनाओं के प्रति नया दृश्टिकोण विकसित होता है।
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Pages:1-2
How to cite this article:
शुभी गुर्जर, ममता गोयल "डॉ. बच्चन सिंह की साहित्येतिहास दृष्टि". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 1, 2024, Pages 1-2
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