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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 10, ISSUE 3 (2024)
हिन्दी भाषा उत्पत्ति में ई-पत्रिकाओं की भूमिका
Authors
सृष्टि कुशवाहा
Abstract
हिन्दी जिस प्रकार से एक वैश्विक भाषा बनती जा रही है उस प्रकार का आर्थिक सहयोग उसे न मिल पाने के कारण वह अपना समुचित विकास नहीं कर पा रही थी परन्तु लघु पत्रिकाओं के समानांतर उभरती ई-पत्रिकाओं में एक बेहतर विकल्प तलाशने में बहुत मदद की है। इन पत्रिकाओं में अभिव्यक्ति को किसी शब्द सीमा में नहीं बांधा जाता यही कारण है कि लेखक अपनी बातें इस मंच पर खुले तौर पर करने में नहीं हिचकते। इन पत्रिकाओं की पहुँच का विस्तार भी पाठकों तक ज्यादा है। दस्तावेजों की सुरक्षा के मामले में भी ई-पत्रिकाएं ज्यादा सुरक्षित हैं। निस्संदेह ई-पत्रिकाओं ने हिन्दी की दुनिया में एक एक क्रांति ला दी है। आज जिस तरह से तकनीकी अपने वर्चस्व को स्थापित करती जा रही है ऐसे में इन पत्रिकाओं का स्थायी महत्व बढ़ता जा रहा है जो कि हिन्दी के भविष्य के लिए एक सुखद संदेश है।
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Pages:27-28
How to cite this article:
सृष्टि कुशवाहा "हिन्दी भाषा उत्पत्ति में ई-पत्रिकाओं की भूमिका". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 3, 2024, Pages 27-28
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