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VOL. 10, ISSUE 3 (2024)
मॉरिशस में हिन्दी कविता की उत्पत्ति और स्वरूप
Authors
सृष्टि कुशवाहा
Abstract
मॉरिशस में हिन्दी कविता का उदय 20वीं शब्ताब्दी के लगभग हुआ किन्तु प्रारम्भ में खण्डकाव्य लिखने का तरीका नहीं मिलता। मूल रूप से यह कहा जा सकता हो कि मॉरीशस का हिन्दी साहित्य अप्रवासी भारतीयों की पीड़ा का प्रामाणिक ग्रन्थ है। पाँच वर्षो की शर्तबंद अवधि में जो भारतीय मॉरीशस ले जाए गए उनमें से कुछ तो वापस भारत आ गए परन्तु कुछ नहीं लौट पाए। जो नहीं लौट पाए उन्होंने क्या क्या दर्द झेला इसी का चित्रण यहाँ के साहित्य में मिलता है। निस्संदेह मॉरिशस के साहित्य ने अप्रवासी भारतीयों को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया है।
मॉरिशस विश्व का अन्यतम देश है। यहाँ हिन्दी के आलावा बहुत सी भाषाएं बोली जाती हैं। यहाँ कोई आधिकारिक भाषा नहीं है, किन्तु यदि विधानसभा क्षेत्रों या यातायात के क्षेत्रों की बात की जाए तो अंग्रेजी का प्रयोग इन क्षेत्रों में ज्यादा किया जाता है। जब भारत ब्रिटिश हुकूमत का गुलाम था तब कई भारतीयों को अंग्रेज मजदूरी करने के लिए मॉरिशस ले आए और भारत की आजादी के बाद भी ये मजदूर यहीं मॉरिशस में ही रहने लगे। 1834 से 1920 के बीच भारत के गिरमिटिया मजदूर मौरिशस में आए और इन्हीं मजदूरों के साथ भोजपुरी और हिन्दी का आगमन मॉरिशस में हो गया।
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Pages:29-30
How to cite this article:
सृष्टि कुशवाहा "मॉरिशस में हिन्दी कविता की उत्पत्ति और स्वरूप". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 3, 2024, Pages 29-30
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