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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 10, ISSUE 3 (2024)
गजानन माधव मुक्तिबोध की रचनाओं में ’’एकांत और अलगाव’’ के विषयों का विश्लेषण
Authors
B Geetha Devi
Abstract
गजानन माधव मुक्तिबोध का जन्म 1917 में एक रियासत में सेवारत एक पुलिस अधिकारी के बेटे के रूप में हुआ था और वे हिंदू पवित्र शहर उज्जैन में पले-बढ़े थे। वे हिंदी साहित्य के सबसे प्रभावशाली कवियों में से एक हैं और उनकी कई रचनाओं का देशव्यापी लोकप्रियता के कारण अंग्रेजी में अनुवाद किया गया है। मुक्तिबोध ने क्लाउड ईथरली के जीवन का उपयोग यह समझाने के लिए किया कि हम सभी के मन में एक तहखाना है और हम निर्दयतापूर्वक अपने सबसे उदात्त और मानवीय विचारों और भावनाओं को वहाँ फेंक देते हैं। हम परिष्कृत मुखौटे पहनते हैं जो हमारे जीवन को सुरक्षित, आश्चर्यजनक रूप से भ्रामक और सफल दिखाते हैं। क्लाउड ईथरली एक गंभीर वास्तविकता का रूपक बन जाता है जहाँ सभी महान मानवीय गुण भेजे जाते हैं और बदले में एक व्यवस्था कुछ तुच्छ लाभ के लिए जानलेवा स्वार्थ का समर्थन करती है। यह कहानी विचारों और संस्कृति में साम्राज्यवाद के मुद्दों को छूती है। तीसरी दुनिया के देशों के विचार और साहित्य आपस में साझा भी नहीं किए जाते हैं और वे अकेले पश्चिम से सोच और ज्ञान के पैटर्न कैसे उधार लेते हैं? लेखकों के काम का एक बुनियादी विषय आमतौर पर आत्म-आलोचना और आत्मनिरीक्षण होता है। मुक्तिबोध ने लेखन की मनोविश्लेषणात्मक पद्धति और इस प्रक्रिया को समझाने के लिए एक ऐतिहासिक-समाजशास्त्रीय तरीका अपनाया। यह लेख मुक्तिबोध के लेखन में एकांत और अलगाव से संबंधित विषयों पर गहराई से चर्चा करता है।
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Pages:43-47
How to cite this article:
B Geetha Devi "गजानन माधव मुक्तिबोध की रचनाओं में ’’एकांत और अलगाव’’ के विषयों का विश्लेषण". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 3, 2024, Pages 43-47
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