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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 10, ISSUE 3 (2024)
दारा शुकोहः संवादधर्मी, सामासिक संस्कृति का संरक्षक
Authors
डॉ. शगुन अग्रवाल
Abstract
दारा शुकोह भारत के इतिहास का वो पात्र है जिसके संबंध में विचारकों तथा इतिहासकारों का मानना है कि यदि औरंगजे़ब के स्थान पर दारा ने मुगलिया सल्तनत की बागडोर संभाली होती तो शायद भारतीय समाज में वैसी धार्मिक संकीर्णता और कट्टरता न मिलती जैसी आज है। इस सोच के मूल में है दारा की संवादधर्मी, उदारवादी विचार-दृष्टि और उसके अनुरूप किए गए उसके कार्य। सत्ता के लिए संघर्ष छल-छद्म तथा मारकाट से भरे मध्यकालीन इतिहास में दारा एक ऐसा व्यक्तित्व है जिसके लिए  इस्लाम तथा हिन्दू धर्म- दर्शनों का अध्ययन, तुलनात्मक-विश्लेषण तथा अनुवाद करना और भारत में संगम-संस्कृति का संरक्षण अधिक ज़रूरी था।
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Pages:53-55
How to cite this article:
डॉ. शगुन अग्रवाल "दारा शुकोहः संवादधर्मी, सामासिक संस्कृति का संरक्षक". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 3, 2024, Pages 53-55
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