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VOL. 10, ISSUE 3 (2024)
भक्त एवं संत की कसौटी पर कवयित्री मीरा
Authors
मौसम तिवारी, डॉ. स्नेहलता दास
Abstract
हिन्दी साहित्य का स्वर्णयुग ‘भक्तिकाल’ सदैव से आकर्षण का केंद्र रहा है। “लक्ष्य एक मार्ग बहुतेरे” यही उक्ति इस काल के ईश्वर प्राप्ति के विविध मार्गों (चाहे वह संतों की हो अथवा भक्तों की) के लिए सर्वथा उपयुक्त विदित होता है। किसी भी कवि अथवा कवयित्री को संत अथवा भक्त के रूप में प्रतिष्ठित करने से पूर्व उन पर विषद चर्चा-परिचर्चा तथा विमर्श की आवश्यकता है। प्रस्तुत आलेख कवयित्री ‘मीरा’ की इसी पृष्ठभूमि पर जाँच-पड़ताल करता है।
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Pages:61-65
How to cite this article:
मौसम तिवारी, डॉ. स्नेहलता दास "भक्त एवं संत की कसौटी पर कवयित्री मीरा". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 3, 2024, Pages 61-65
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