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VOL. 10, ISSUE 4 (2024)
हिंदी साहित्य एवं सिनेमा में वंचित एवं शोषित समाज (‘गोदान’ के विशेष संदर्भ में)
Authors
प्राजक्ता शिवाजी कुरळे
Abstract
सिनेमा जगत के लिए सन् 1913 बड़ा ही लाभदायक साबित हुआ। सन् 1913 में दादासाहेब फालके जी ने अपना प्रथम सिनेमा ‘राजा हरिश्चंद्र’। यहाँ से सिनेमा सृष्टि के विकास की यात्रा आरंभ हो गई। समय के चलते इसमें अनेक बदलाव होने लगे, जिससे सिनेमा और साहित्य दोनों का नाता एकदूसरे के साथ अधिक घनिष्ठ बनता गया। साहित्य से ही सामाजिक समस्याओं का चित्रण और सामाजिक जागृत सिनेमा के माध्यम से होने लगी। यही कारण है कि साहित्य के बिना सिनेमा जड़े मजबूत नहीं बन सकती। जिसका वास्तव प्रेमचंद के गोदान से ज्ञात होता है।
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Pages:28-30
How to cite this article:
प्राजक्ता शिवाजी कुरळे "हिंदी साहित्य एवं सिनेमा में वंचित एवं शोषित समाज (‘गोदान’ के विशेष संदर्भ में)". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 4, 2024, Pages 28-30
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