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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 10, ISSUE 4 (2024)
अस्तित्व की लड़ाईः आदिवासी कविता
Authors
कृष्ण प्रीति ए. आर
Abstract
आदिवासी समुदायों का संघर्ष केवल उनकी पहचान और अस्तित्व के लिए नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए भी है, जो पृथ्वी के समग्र अस्तित्व से जुड़ा हुआ है। यह संघर्ष उन सामाजिक-आर्थिक दबावों को उजागर करता है, जो आदिवासियों को शोषण, कर्ज और बंधुआ मजदूरी की ओर धकेलते हैं, साथ ही पारंपरिक आजीविका के नुकसान और विस्थापन के कारण आत्महत्या की दर को बढ़ाते हैं। आदिवासी महिलाओं को त्रिगुणी भेदभाव का सामना करना पड़ता है, जिससे वे कई प्रकार के शोषण की शिकार होती हैं। बाजारीकरण पर आधारित समाज इस संघर्ष को नजरअंदाज करता है और आदिवासी प्रतिरोध को तुच्छ मानता है, जबकि यह पर्यावरणीय स्थिरता और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए अनिवार्य है। इस संदर्भ में आदिवासी कविता एक सशक्त माध्यम के रूप में उभरती है, जो उनके संघर्ष और आशा को व्यक्त करती है, और इस विमर्श को वैश्विक जागरूकता और एकजुटता की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
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Pages:44-47
How to cite this article:
कृष्ण प्रीति ए. आर "अस्तित्व की लड़ाईः आदिवासी कविता". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 4, 2024, Pages 44-47
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