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VOL. 10, ISSUE 4 (2024)
अनुवाद संबंधी भ्रांतियां और उनके समाधान
Authors
डॉ. शगुन अग्रवाल
Abstract
अनुवाद सम्प्रेषण है, लेकिन यह सम्प्रेषण की एक बहुत ही जटिल प्रक्रिया है। अनुवाद शब्द से स्पष्ट ध्वनित होता है कि अनुवादक को मूल रचनाकार के पीछे चलना है। वह मूल रचना के विचारों, भावों एवं आशय से बंधा होता है। लेकिन मूल पाठ के लेखक के पदचिन्हों पर चलना मात्र ही उसका उद्देश्य नहीं है। आशय है-दिशा की ओर अनुगमन करना, लेखक के आशय एवं लक्ष्य के प्रति गतिशील होना। इस प्रकार अनुवादक की पहली समस्या यही है कि वह स्वतंत्र है भी और नहीं भी। उसे मूल रचना के भाव एवं अभिव्यंजन की सीमाओं में रहना है, अपनी स्वतन्त्र सृजनशील प्रतिभा का उपयोग भी उन्हीं सीमाओं के भीतर करना है। यदि कहा जाए कि अनुवाद का काम मूल लेखन से कठिनतर है तो गलत न होगा।
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Pages:25-27
How to cite this article:
डॉ. शगुन अग्रवाल "अनुवाद संबंधी भ्रांतियां और उनके समाधान". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 4, 2024, Pages 25-27
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