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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 10, ISSUE 4 (2024)
विभाजन की त्रासदी और 'जिन्दा मुहावरे': एक सामाजिक और साहित्यिक अध्ययन
Authors
ममता मिश्रा
Abstract
नासिरा शर्मा का उपन्यास 'जिन्दा मुहावरे' भारतीय स्वतंत्रता और विभाजन के समय की त्रासदी को गहराई से उकेरने वाली एक महत्वपूर्ण साहित्यिक कृति है। यह उपन्यास विभाजन के दौरान और उसके पश्चात् के सामाजिक, सांस्कृतिक, और मानवीय संघर्षों का संवेदनशील चित्रण प्रस्तुत करता है। लेखिका ने विभाजन की पृष्ठभूमि में उत्पन्न मानसिक, सामाजिक, सांप्रदायिक, और पारिवारिक समस्याओं को बड़ी ही कुशलता से उभारा है। उपन्यास का कथानक रहमतुल्लाह और उनके परिवार के इर्द-गिर्द घूमता है, जो विभाजन के कारण मानसिक, सामाजिक, और सांस्कृतिक विछोह का सामना करते हैं। निजाम का पाकिस्तान जाना और वहां 'महाजिर' कहलाना, साथ ही अपने वतन की याद में तड़पते रहना, मानव पीड़ा का सजीव चित्रण है। सांप्रदायिक दंगों, धर्म आधारित हिंसा, और राजनीतिक षड्यंत्रों को भी उपन्यास में बड़ी प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है। इसके साथ ही, उपन्यास में पारंपरिक मान्यताओं, परंपराओं, और रूढ़ियों का मोह भी दिखाया गया है, जो विभाजन के बावजूद समाज पर अपना गहरा प्रभाव बनाए रखते हैं। महानगरीय जीवन की त्रासदी, जहां व्यक्ति स्वार्थ और भौतिकवाद में खो जाता है, भी उपन्यास में गहराई से उभरी है। नासिरा शर्मा का यह उपन्यास न केवल विभाजन की पीड़ा और त्रासदी को सामने लाता है, बल्कि समाज में व्याप्त समस्याओं का समाधान खोजने की प्रेरणा भी देता है। यह कृति विभाजन साहित्य में एक मील का पत्थर है, जो न केवल ऐतिहासिक घटनाओं को सहेजती है, बल्कि सामाजिक और मानवीय मूल्यों की पुनःस्थापना की दिशा में मार्गदर्शक भी है।
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Pages:58-61
How to cite this article:
ममता मिश्रा "विभाजन की त्रासदी और 'जिन्दा मुहावरे': एक सामाजिक और साहित्यिक अध्ययन". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 4, 2024, Pages 58-61
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