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VOL. 11, ISSUE 1 (2025)
चन्द्रकांता की कहानियाँः स्त्री समानता के धरातल पर
Authors
वीरेन्द्र किस्कू
Abstract
चन्द्रकांता की कहानियों में ”धरातल पर स्त्रियों की समानता पर विचार” विभिन्न रचनाकारों से पूर्णतया अलग है। चन्द्रकांता का विचार हैं कि मेरे उपन्यासों एवं कहानियों में महत्त्वपूर्ण स्त्रियों की समानता एवं कल्पनाएँ हैं। अपनी कहानियों में वे महिलाओं के अधिकारों, शोषण और विद्रोहों की पड़ताल करते हैं, तथा समय के साथ विकसित होते समाज के संदर्भ में महिलाओं की समानता के संबंध में उनके विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हैं।
चन्द्रकांता के अनुसार, “महाश्वेता देवी की तरह, मुझे लगता है कि महिला लेखकों के लिए नारीवाद के तर्कों में उलझने के बजाय वास्तविक धरातल, जमीनीं सच्चाईयों के साथ देखना जरूरी है, विश्व जगत में रहने वाली महिलाओं की जाँच करना महत्त्वपूर्ण है। महिला लेखकों का विषय इन दिनों युद्ध क्षेत्र में बदल रहा है। कुछ बुद्धिजीवी नारीवाद की वकालत करते हैं, जबकि अन्य इसे परिवार के लिए खतरा मानते हैं। मेरी राय में, दोनों ही अनावश्यक हैं।”1 वैचारिक स्तर पर, चन्द्रकांता ने अपनी कहानियों में स्त्री पात्रों को धरातल पर मजबूत, आत्म-जागरूक और प्रबुद्ध के रूप में दिखाया है, और उनमें जीवन के प्रति अटूट दृढ़ संकल्प है। इस संबंध में उनका दृष्टिकोण है कि “महिलाओं को अपनी क्षमताओं को विकसित करने में कठिनाई होती है। हालाँकि, वह किसी भी स्थिति में समाज के पुरुष को अस्वीकार नहीं करती है, वह केवल उनके बीच सम्मान का स्थान चाहती है।”2
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Pages:32-34
How to cite this article:
वीरेन्द्र किस्कू "चन्द्रकांता की कहानियाँः स्त्री समानता के धरातल पर". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 1, 2025, Pages 32-34
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