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VOL. 11, ISSUE 1 (2025)
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की बाल कहानियों में जीवन मूल्य
Authors
एम. वी. गायत्री लक्ष्मी, डॉ. खंदारे चन्दू लक्ष्मण
Abstract
बच्चे भविष्य के निर्माता होते हैं। बाल-मन एक खाली स्लेट की तरह ही है। बाल्यावस्था में जो भी वे अपनी आदत बनाते हैं, वहीं जिंदगी भर उनका स्वभाव होते हैं। इसलिए उस खाली स्लेट पर अपने पारिवारिक एवं सामाजिक दोनों जीवन-पक्ष में सफलता पाने के लिए आदर्श-युक्त और स्वस्थ मूल्यों को खींचना सभी माँ-बाप और शिक्षक का कर्तव्य होता है। बच्चों के मन में आदर्श स्थापना करने में बाल साहित्य अत्यन्त महत्वपूर्ण योगदान निभाता है। छायावादी लेखक सूर्यकांत त्रिपाठी निराला बाल साहित्य पर भी अपनी कलम चलाई। इनके बाल साहित्य तीन तरह का है - सीखभरी कहानियाँ, एतिहासिक और पौराणिक। उनकी सीखभरी कहानियाँ लगभग चालीस हैं। ‘महाराणा प्रताप’ उनका एतिहासिक बाल उपन्यास है और ‘भक्त ध्रुव’, ‘भीष्म’, ‘भक्त प्रह्लाद’, ‘महाभारत’ इनके पौराणिक बाल उपन्यास और ‘रामायण की अन्तर्कथाएँ’ इनकी पौराणिक बाल कहानियाँ का संकलन है। प्रस्तुत शोध पत्र निराला जी की ‘सीखभरी कहानियाँ’ का अध्ययन है जो सुबोध भाषा में बच्चों को कई जीवन मूल्य सिखाती हैं।
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Pages:46-49
How to cite this article:
एम. वी. गायत्री लक्ष्मी, डॉ. खंदारे चन्दू लक्ष्मण "सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की बाल कहानियों में जीवन मूल्य". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 1, 2025, Pages 46-49
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