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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 11, ISSUE 1 (2025)
21वीं सदी के हिंदी उपन्यास साहित्य में चित्रित किन्नर समुदाय की अस्मिता का यथार्थ
Authors
आकाश यादव
Abstract
21वीं सदी के बदलते परिवेश में तकनीकी के साथ-साथ समाज, व्यक्ति और साहित्य में भी परिवर्तन देखने को मिल रहा है। उपन्यास आधुनिक काल का जीवन्त साहित्यिक रूप है। 21वीं सदी का उपन्यास साहित्य संसार के विचारों भावों तथा संकल्पों की शाब्दिक अभिव्यक्ति का साधन है। हिंदी उपन्यास का विषय गत फलक विस्तृत रहा है। हिंदी उपन्यास साहित्य अपने जन्म से लेकर वर्तमान समय तक अनेक विषयों को प्रवाहित करता रहा है। समसामायिकता को प्रस्तुत करना 21वीं सदी के उपन्यासों की विशेषता रही है। वस्तुतः तो समाज में जो कुछ भी व्याप्त है, वह उपन्यासकार की संवेदना, चिंता और चिंतन का विषय होता है। साहित्य के माध्यम से ही साहित्यकार समाज से संवाद स्थापित करता है और समाज की चिंताओं को साहित्य के पटल पर उभरता है। उपेक्षित जन समुदायों को वाणी देना 21वीं सदी के हिंदी उपन्यास साहित्य की महत्वपूर्ण विशेषता है। आज हिंदी उपन्यास अनेक उपेक्षितों के पास पहुंच रहा है। इसके लिए किन्नर अर्थात थर्ड जेंडर जीवन भी अछूता नहीं है। समाज का दायित्व था कि वह थर्ड जेंडर के रूप में पहचाने जाने वाले इस तीसरे मानवीय प्राणी को अंगीकार करता। दुर्भाग्य बस ऐसा हुआ नहीं। फिर साहित्यकारों का ध्यान इस और गया। 21वीं सदी के हिंदी उपन्यासों में वर्तमान जीवन की विभिन्न समस्याओं के साथ किन्नर समुदाय की अस्मिता को भी विशेष रूप से चित्रित किया गया है। कई उपन्यासकारों ने किन्नर जीवन केंद्रित उपन्यास लिखकर उनके उपेक्षित जीवन को समाज के सम्मुख लाने का प्रयास किया है।
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Pages:50-54
How to cite this article:
आकाश यादव "21वीं सदी के हिंदी उपन्यास साहित्य में चित्रित किन्नर समुदाय की अस्मिता का यथार्थ". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 1, 2025, Pages 50-54
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