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VOL. 11, ISSUE 1 (2025)
बस्तर के दशहरा मेला का ऐतिहासिक महत्व
Authors
संजय लकड़ा
Abstract
बस्तर के आदिवासियों की अभूतपूर्व भागीदारी का ही प्रतिफल है कि बस्तर दशहरा की राष्ट्रीय पहचान स्थापित हुई है। छत्तीसगढ के जगदलपुर नगर में दशहरा अत्यन्त गरिमा और सांस्कृतिक वैभव के साथ मनाया जाता रहा है। भूतपूर्व बस्तर रियासत में टेम्पल व्यवस्था के तहत पूर्णतः सार्वजनिक दशहरा पर्व मनाया जाता था। समय बदला, व्यवस्था, परिस्थितियाँ बदली, समाज बदला और इसके साथ मनुष्य का जीवन भी बदला। शासन ने जन भावनाओं का सम्मान करते हुए इसमें अपनी रचनात्मक भूमिका निर्धारित की। ऐसी भूमिका कि यह परम्परा लगातार विकसित होती रहे। बस्तर का आदिम लोक जीवन अपनी ऐतिहासिक शक्ति को भूलकर इस वैज्ञानिक युग में भी अगर अदृश्य देवी-देवताओं के सम्मोहन में बंधा हुआ है। धर्म पर आधारित यह सम्मोहन ही उसे भरोसा दिलाता है कि अगला जन्म इससे भी बेहतर होगा।
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Pages:93-96
How to cite this article:
संजय लकड़ा "बस्तर के दशहरा मेला का ऐतिहासिक महत्व". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 1, 2025, Pages 93-96
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