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VOL. 11, ISSUE 2 (2025)
विश्व जल दिवस और "नदी और साबुन" कविता की प्रासंगिकता
Authors
निहाला वी पी, डॉ.अब्दुल जब्बार एम
Abstract
भारतीय साहित्य में पर्यावरणीय चेतना का स्वर अत्यंत पुरातन है,और कई कवियों ने अपने काव्य में प्रकृति के विनाश की संभावनाओं को दूरदृष्टि से देख लिया था ।ऐसे ही एक सशक्त कवि ज्ञानेन्द्रपति हैं,जिन्होंने बहुत पहले ही नदियों पर बढ़ते मानवीय आक्रमण ,उनके प्रदूषण और परिणामों की सशक्त चेतावनी दी थी ।उनकी कविता "नदी और साबुन" एक सशक्त उदहारण है कि साहित्य कैसे सामजिक और पर्यावर्णीय संकटों का पूर्वानुमान कर सकता है ।
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Pages:43-45
How to cite this article:
निहाला वी पी, डॉ.अब्दुल जब्बार एम "विश्व जल दिवस और "नदी और साबुन" कविता की प्रासंगिकता". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 2, 2025, Pages 43-45
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