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VOL. 11, ISSUE 2 (2025)
“संत पलटूदास के वचनों में दार्शनिक चिंतन”
Authors
डॉ. यशवंत कुमार साव
Abstract
संत
पलटू ने मूलतः दार्शनिक नहीं थे इसके बाद भी उन्होंने अपने वचनों में भारतीय दर्शन
के मूल आध्यात्मिक, आधिभौतिक और आधिदैविक – इन तीन तापों से मुक्ति का उपाय सुझाया है| मनुष्य
माया, मोह के वशीभूत होकर सांसारिक भोग विलास में लिप्त रहकर अपने मूल्यवान जीवन
के अनमोल क्षणों को नष्ट करता है| मनुष्य का अंतिम लक्ष्य परमात्मा की प्राप्ति
है| जिसके लिए जीवन में सद्गुरु का मिलना आवश्यक है| इस संसार रूपी भवसागर से पार
होने के लिए, जीवन-मरण के चक्र से मुक्त होने के लिए सद्गुरु आवश्यक है वही हमें
सच्चा मार्ग दिखा सकता है| पलटू ने स्वानुभूति के आधार पर जन साधारण को उनके ही
शब्दों में सांसारिक दुखों से मुक्ति का मार्ग बताया है| संत पलटू ने तीर्थ, हवन,
पूजा-पाठ, व्रत आदि को आडंबर मानते हुए इसे आत्म ज्ञान के मार्ग में बाधक माना है|
साथ ही पलटू के मन में जातिगत ऊंच-नीच, सामाजिक, आर्थिक भेद-भाव के लिए कोई स्थान
नहीं है| संसार का प्रत्येक मनुष्य ब्रह्म ज्ञान का अधिकारी है|
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Pages:48-50
How to cite this article:
डॉ. यशवंत कुमार साव "“संत पलटूदास के वचनों में दार्शनिक चिंतन”". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 2, 2025, Pages 48-50
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