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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 11, ISSUE 2 (2025)
हिंदी-ओड़िआ लोक कहावतों में स्वास्थ्य-विज्ञान
Authors
मौसम तिवारी, डॉ. स्नेहलता दास
Abstract
आज का युग आधुनिक-यांत्रिक-वैज्ञानिक युग है। इसमें साहित्य के समक्ष अपनी उपयोगिता और उपादेयता को सिद्ध करने की चुनौती है। इस दिशा में लिखित साहित्य पर बहुत अधिक कार्य हुए हैं और हो रहे हैं। हालाँकि मौखिक साहित्य को सहेजना और उस पर शोध कार्य करना आज के समय की माँग है। लोक कहावतें लोक के संचित ज्ञान की खान हैं। हमारे पूर्वजों ने सदियों से संचित अपने समस्त ज्ञान को इस कहावत रूपी धरोहर के माध्यम से हमें हस्तांतरित किया है। आज हम आधुनिक स्वास्थ्यविज्ञान पर आश्रित हैं, इसकी जड़े सदियों से चली आ रही लोक कहावतों में भी फैली हैं। इन कहावतों ने ही लोकजीवन में स्वास्थ्य-ज्ञान को प्रचारित-प्रसारित करने का कार्य किया है। हिंदी-ओड़िआ दोनों भाषाओं में स्वास्थ्यविज्ञान से संबंधित अनेकानेक कहावतें देखने को मिलती हैं। प्रस्तुत आलेख पूर्वजों की इस विरासत को बचाए रखने के लिए इनकी गहरी सूक्ष्म पड़ताल करता है। साथ ही दोनों भाषाओं की स्वास्थ्यविज्ञान संबंधी लोकोक्तियों में वैज्ञानिक चिंतन का अनुसन्धान और उनका तुलनात्मक विवेचन करता है।
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Pages:78-81
How to cite this article:
मौसम तिवारी, डॉ. स्नेहलता दास "हिंदी-ओड़िआ लोक कहावतों में स्वास्थ्य-विज्ञान". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 2, 2025, Pages 78-81
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