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VOL. 11, ISSUE 2 (2025)
पंत के काव्य में प्रकृति का जीवंत एवं भव्य चित्रण
Authors
डॉ० निधि शर्मा
Abstract
अनादिकाल से ही मानव प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहा है। शारीरिक, आध्यात्मिक एवं मानसिक तीनों दृष्टियों से प्रकृति मनुष्य का पोषण करती हुई उसके विकास में सदैव सहायक बनी है। मनुष्य मन और काव्य के मध्य प्रकृति संयोजक की भूमिका निभाती है। बहुमुखी प्रतिभा के धनी, सशक्त लेखक एवं महान कवि सुमित्रानंदन पंत का कविता-काल प्रकृति चित्रण से ही प्रारंभ हुआ। इनके काव्य में नवीनता, मौलिकता के साथ-साथ विविधता के दर्शन भी होते हैं। इन्होंने प्रकृति-सौंदर्य एवं मानव मन की भावनाओं, आशाओं, आकांक्षाओं को अपने काव्य में वर्णित किया है। इनकी जन्म स्थली कसौनी ग्राम (जिला अल्मोड़ा, उत्तरप्रदेश) अपनी मनोहारी प्राकृतिक छटा के लिए सुप्रसिद्ध रही है। बाल्यावस्था से ही सुमित्रानंदन पंत प्रकृति की ओर आकृष्ट रहे जिसका स्पष्ट प्रभाव उनके व्यक्तित्व में झलकता है। कवि पंत ने प्रकृति के मनोहारी दृश्यों एवं रूपों का सरस चित्रण अपने काव्य में किया है।
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Pages:94-96
How to cite this article:
डॉ० निधि शर्मा "पंत के काव्य में प्रकृति का जीवंत एवं भव्य चित्रण". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 2, 2025, Pages 94-96
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