Logo
International Journal of
Hindi Research
ARCHIVES
VOL. 11, ISSUE 3 (2025)
वैश्वीकरण: हिन्दी भाषा एवं साहित्य का दिशा निर्धारण
Authors
डॉ अंकिता बोरा
Abstract
वैश्वीकरण के दौर में बदलते भाषा स्वरूप एवं साहित्य का आंकलन इस शोध का मूल उद्देश्य है। अन्तर्राष्ट्रीय परिवेश का प्रभाव हिन्दी भाषा एवं साहित्य को नई दिशा दे रहा है। नई भाषा की अवधारणा की स्वीकार्यता का प्रश्न भी हमारे सामने उत्पन्न हो गया है। वैश्विक स्तर पर हिन्दी भाषा की बढ़ती स्वीकार्यता में सिनेमा, बाजार, सोशल मीडिया का योगदान भी दिखाई देता है। भूमण्डलीकरण के दौर में प्रवासी साहित्य भी हिन्दी भाषा एवं साहित्य का विस्तार कर रहा है। हिन्दी को विश्व-बाजार में अपनी पहचान बनाने के लिए ‘विश्व हिन्दी सम्मेलनोें‘ का आयोजन समय-समय पर किया जाता है, जो हिन्दी भाषा के विश्व पाठकों एवं साहित्यकारों का परिचय कराते हैं, जो कि हिन्दी भाषा एवं साहित्य को विश्व पटल पर रखने का भी एक माध्यम है। इसके साथ ही भूमण्डलीकरण के इस समय में इन सम्मेलनों के आयोजन का लक्ष्य - वैश्विक धरातल पर सूचना प्रौद्योगिकी के द्वारा हिन्दी भाषा के विकास और प्रचार-प्रसार, हिन्दी परिषद की स्थापना तथा विदेशों में हिन्दी भाषा एवं साहित्य का प्रचार करना होता है।
Download
Pages:1-4
How to cite this article:
डॉ अंकिता बोरा "वैश्वीकरण: हिन्दी भाषा एवं साहित्य का दिशा निर्धारण". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 3, 2025, Pages 1-4
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.