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VOL. 11, ISSUE 3 (2025)
हिंदी उपन्यास लेखन परम्परा और किसान जीवन
Authors
रघुवीर दान चारण,डॉ. अखिलेश कुमार शर्मा
Abstract
हिंदी उपन्यास परम्परा में प्रेमचन्द से पूर्व छिटपुट रूप से किसान जीवन का उल्लेख मिलता है; परन्तु किसान जीवन के सम्पूर्ण ताने-बाने को लेकर उपन्यास लेखन की शुरुआत प्रेमचंद करते हैं। इसके उपरान्त भारत के स्वाधीन होने के साथ ही किसानों को भी अपनी उन्नति का पथ नज़र आने लगा; लेकिन जब धरातल पर यथार्थ से सामना हुआ तो स्थिति कुछ और ही थी। जो पहले जमींदार थे, अब वे सत्ता में हैं। किसान की यह दयनीय स्थिति उदारीकरण के बाद और अधिक विकराल हो गई। आधुनिकता के इस दौर में जहाँ एक ओर किसान औद्योगीकरण एवं बाजारवाद के चरमोत्कर्ष के बीच अपनी प्रतिष्ठा को स्थापित करने हेतु संघर्षरत है। वहीँ दूसरी ओर सरकारी भ्रष्ट तंत्र, पूँजीवाद और बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने मिलकर एक ऐसे भंवरजाल का निर्माण किया है जिसमें किसान को स्वयं अपनी जीवन लीला समाप्त करने के अतिरिक्त दूसरा मार्ग दिखाई नहीं देता। हिंदी उपन्यास परम्परा में किसान की प्रतिष्ठा के इस संघर्ष में उसके पूरे परिवार को जूझते हुए स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
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Pages:19-21
How to cite this article:
रघुवीर दान चारण,डॉ. अखिलेश कुमार शर्मा "हिंदी उपन्यास लेखन परम्परा और किसान जीवन". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 3, 2025, Pages 19-21
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