भारतीय
भक्ति आंदोलन के दो महान कवि कबीर और सूरदास ने अपने कालजयी काव्य से लोककाव्य पर
गहरा और बहुआयामी प्रभाव डाला है। यह शोध-पत्र इसी प्रभाव का एक विस्तृत, विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यह अध्ययन लोकगीतों,
कहावतों, मुहावरों और लोक कथाओं के साहित्यिक और
सांस्कृतिक पाठों का गहराई से पाठ विश्लेषण करता है। इसके लिए,
कबीर और सूरदास की
रचनाओं के साथ-साथ संकलित लोक साहित्य का भी अध्ययन किया गया है। यह शोध सिद्ध
करता है कि, इन कवियों का प्रभाव केवल साहित्यिक नहीं है, बल्कि यह लोकमानस, सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों
में गहराई से समाहित है। इस अध्ययन का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि, उनका
प्रभाव पहले के अनुमानों से कहीं अधिक व्यापक और गहन है, जिसे यहाँ अधिक प्रभावी ढंग से समझा जा
सकता है।
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