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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 11, ISSUE 3 (2025)
संस्मरणश् अर्थ, अवधारणा एवं अन्य गद्य विधाओं से अंतर्संबंध
Authors
श्रीमती वीणा पांडे
Abstract
संस्मरण आधुनिक हिंदी साहित्य की सबसे लोकप्रिय विद्या है। इसमें सामान्यतः किसी महान व्यक्ति, स्थान अथवा घटना को रचनाकार स्मृति के आधार पर शब्दबद्ध करता है । बालमुकुंद गुप्त द्वारा 1907 में प्रताप नारायण मिश्र पर लिखे संस्मरण को हिंदी का पहला संस्मरण माना जाता है । कालांतर में द्विवेदीयुग, छायावाद तथा उत्तर आधुनिक काल की यात्रा करते हुए संस्मरण विधा आज साहित्य जगत की प्रतिष्ठित गद्य विधा बन गई है। संस्मरण का अर्थ श्सम्यक् स्मरणश् से किया जाता है। इसी कारण इस विधा का  अन्य गद्येतर विधाओं से भी अंतरसंबंध देखा जाता है । जिसमे रेखाचित्र इसके सबसे अधिक सन्निकट देखी जाती है। दोनों में इतनी समरूपता है कि इनमें भेद स्थापित करना अत्यंत दुष्कर कार्य जान पड़ता है। इसी प्रकार से कहानी, आत्मकथा जीवनी, यात्रावृत्त आदि की भी आधारशिला इसी संस्मरण को माना जाता है । यही कारण है संस्मरण सभी विधाओं में प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से अंतर्भूत है।  प्रस्तुत लेख में संस्मरण के अर्थ, अवधारणा,प्रकृति के साथ-साथ अन्य विधाओं के साथ साम्य वैषम्य  एवं अंतर्संबंध को व्याख्याित करने का प्रयास किया गया है।
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Pages:75-80
How to cite this article:
श्रीमती वीणा पांडे "संस्मरणश् अर्थ, अवधारणा एवं अन्य गद्य विधाओं से अंतर्संबंध". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 3, 2025, Pages 75-80
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