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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 11, ISSUE 3 (2025)
माखनलाल चतुर्वेदी की काव्य चेतनाः एक समग्र अध्ययन
Authors
विजय कुमार यादव
Abstract
यह शोधपत्र माखनलाल चतुर्वेदी की काव्य चेतना का समग्र अध्ययन प्रस्तुत करता है। माखनलाल चतुर्वेदी (1889-1968) हिन्दी साहित्य के बहुआयामी व्यक्तित्व थे वे कवि, पत्रकार और स्वतंत्रता संग्राम के निर्भीक सेनानी रहे। उनकी रचनाओं में राष्ट्रप्रेम, प्रकृति-सौंदर्य, मानवीय संवेदना और सामाजिक चेतना का अद्वितीय संगम मिलता है। एक भारतीय आत्माश् के रूप में प्रतिष्ठित चतुर्वेदी जी ने अपनी कविताओं के माध्यम से न केवल भारतीय जनमानस को स्वतंत्रता के लिए प्रेरित किया, बल्कि मानवता और सामाजिक समरसता के आदर्शों को भी प्रतिष्ठित किया। शोधपत्र में उनकी काव्य चेतना के विभिन्न आयामों राष्ट्रीय प्रेम और राष्ट्रीय चेतना, प्रकृति चिंतन, मानवीय संवेदना तथा सामाजिक चेतना का विस्तारपूर्वक विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि चतुर्वेदी जी का काव्य केवल सौंदर्य-चेतना तक सीमित नहीं, बल्कि युग की ऐतिहासिक परिस्थितियों और सामाजिक आवश्यकताओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। उनकी कविताएँ जैसे ष्पुष्प की अभिलाषाष्, ष्प्यारे भारत देशष् तथा अन्य कृतियाँ भारतीय स्वाधीनता आंदोलन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। समग्रतः, माखनलाल चतुर्वेदी की काव्य चेतना राष्ट्रभक्ति, मानवतावाद और प्रकृति-प्रेम का संतुलित संगम है, जो हिन्दी साहित्य को एक नया आयाम प्रदान करता है। इस शोध से यह निष्कर्ष निकलता है कि चतुर्वेदी जी की रचनाएँ आज भी भारतीय समाज और साहित्य के लिए उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी स्वतंत्रता संग्राम के काल में थीं।
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Pages:90-92
How to cite this article:
विजय कुमार यादव "माखनलाल चतुर्वेदी की काव्य चेतनाः एक समग्र अध्ययन". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 3, 2025, Pages 90-92
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