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VOL. 11, ISSUE 4 (2025)
स्वामी विवेकानंद और भारत का पुनर्निर्माण: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
Authors
डॉ. हरीश चंद
Abstract
स्वामी विवेकानंद उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध के ऐसे महान युगपुरुष थे जिन्होंने भारतीय संस्कृति, समाज और राजनीति को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक धरोहर को पुनर्जीवित करते हुए आत्मनिर्भरता, शिक्षा, धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक न्याय को राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का आधार बनाया। यह शोध-पत्र विवेकानंद के विचारों और उनके भारतीय समाज पर पड़े प्रभाव का विश्लेषण करता है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि विवेकानंद का दर्शन न केवल भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को प्रेरणा देता है, बल्कि आज के वैश्वीकरण और नवउदारवादी दौर में भी सामाजिक-आर्थिक न्याय तथा सांस्कृतिक पहचान की दृष्टि से प्रासंगिक है। स्वामी विवेकानंद आधुनिक भारत के उन महान व्यक्तित्वों में से हैं जिन्होंने भारतीय समाज, संस्कृति और राजनीति को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने आत्मनिर्भरता, शिक्षा, आध्यात्मिकता और सामाजिक समरसता पर बल दिया। यह शोध पत्र भारत के पुनर्निर्माण में विवेकानंद के विचारों की प्रासंगिकता का विश्लेषण करता है। अध्ययन में विशेष रूप से उनके राष्ट्रवाद, युवा जागरण, धार्मिक सहिष्णुता तथा शिक्षा-नीति संबंधी योगदानों का मूल्यांकन किया गया है। आज के वैश्विक युग में भी विवेकानंद का दृष्टिकोण भारत की विकास यात्रा और सांस्कृतिक अस्मिता को सशक्त बनाने में प्रेरक सिद्ध होता है।
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Pages:32-36
How to cite this article:
डॉ. हरीश चंद "स्वामी विवेकानंद और भारत का पुनर्निर्माण: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 4, 2025, Pages 32-36
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