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VOL. 11, ISSUE 4 (2025)
वर्तमान परिदृश्य एवं कबीर. काव्य की प्रासंगिकता
Authors
डॉ. धनंजय कुमार
Abstract
यह शोध आलेख संत कबीर दास के निर्गुण भक्ति काव्य और उनके तत्कालीन समाज पर पड़े गहरे प्रभाव का विश्लेषण करता है। कबीर की रचनाएँ केवल धार्मिक उपदेश नहीं थीं, बल्कि सामाजिक असमानता, धार्मिक पाखंड और कर्मकांडों के विरुद्ध एक सशक्त वैचारिक आंदोलन थीं। कबीर 15वीं शताब्दी के एक महान संत, रहस्यवादी कवि और समाज सुधारक थे, जिनकी शिक्षाओं ने उत्तर भारत के भक्ति आंदोलन को बहुत प्रभावित किया। उन्होंने धार्मिक पाखंड, अंधविश्वासों और सामाजिक बुराइयों का कड़ा विरोध किया और सभी मनुष्यों की समानता पर जोर दिया।इस आलेख में हम उनके निर्गुण ब्रह्म के विचार, उनकी काव्य-शैली और उनके विचारों की तत्कालीन सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में प्रासंगिकता की पड़ताल करेंगे।
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Pages:12-14
How to cite this article:
डॉ. धनंजय कुमार "वर्तमान परिदृश्य एवं कबीर. काव्य की प्रासंगिकता". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 4, 2025, Pages 12-14
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