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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 11, ISSUE 4 (2025)
आर्द्रा: आधुनिक जीवन में एक माँ की पीड़ा
Authors
डॉ. रोहित कुमार
Abstract
नई कहानी के कथाकारों ने अपरिचित आधुनिक परिवेश में प्रवेश कर रहे व्यक्ति को उसके नवीन संबंधों और मूल्यों के परिप्रेक्ष्य में विश्लेषित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है | अतीत में गहरे धंसे किसी भी जीवन मूल्य तथा संबंध से व्यक्ति न तो पूरी तरह मुक्त हुआ है और न ही वह उन समस्याओं का कोई हल दे सका है जो आधुनिक समाज ने उत्पन्न किए हैं | समाज जब अपनी एक अवस्था को पूरा कर दूसरी अवस्था में प्रवेश करता है तो मानवीय संबंधों और सामाजिक मूल्यों में परिवर्तन या विघटन देखने को मिलता है | ऐसी स्थिति में व्यक्ति ही नहीं बल्कि उसके साथ-साथ पूरा समाज ही भीतरी छटपटाहट को सह रहा होता है | यही कारण है कि सामाजिक परिवर्तन के दौर में नई कहानी प्रदत्त सत्यों के नकार से उत्पन्न अनुभवजनित ‘प्रमाणिकता की खोज’  कही गयी | हम मोहन राकेश की कहानी ‘आर्द्रा’ के माध्यम से आधुनिक जीवन में एक माँ की पीड़ा को समझने की कोशिश करेंगे |
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Pages:58-60
How to cite this article:
डॉ. रोहित कुमार "आर्द्रा: आधुनिक जीवन में एक माँ की पीड़ा". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 4, 2025, Pages 58-60
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