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VOL. 11, ISSUE 4 (2025)
उत्तर औपनिवेशिक अध्ययन
Authors
आकिब जावेद
Abstract
उत्तर औपनिवेशिक अध्ययन आधुनिक आलोचना की वह महत्वपूर्ण दिशा है, जिसका प्रभाव उपनिवेशवादी विचारधारा और उसके बाद उत्पन्न भाषिक,सांस्कृतिक तथा राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण करती है। यह अध्ययन केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक ही सीमित नहीं है, बल्कि बौद्धिक, सांस्कृतिक और मानसिक स्वतंत्रता की खोज का भी प्रतीक है। उत्तर औपनिवेशिक चिंतन का उद्देश्य उन सत्ता-संरचनाओं और भाषिक प्रभुत्वों को प्रकाशित करना है, जो औपनिवेशिक शासन के करण से समाजों में गहराई तक व्याप्त हो गए थे। उत्तर औपनिवेशिकता एक विमर्श है, जो उपनिवेशित समाज की मनःस्थिति का अध्ययन करता है।उत्तर औपनिवेशिक विमर्श के अंतर्गत यूरोपीय औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतिरोध में विकसित हुए विचारों का अध्ययन किया जाता है। एडवर्ड सईद, गायत्री चक्रवर्ती स्पिवाक, होमी के. भाभा, बिल ऐशक्रॉफ्ट आदि सिद्धांतकारों ने उत्तर औपनिवेशिकता को केवल एक सैद्धांतिक प्रतिरोध के रूप में नहीं, बल्कि एक वैचारिक मुक्ति के रूप में प्रस्तुत किया है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि औपनिवेशिकता ने 'अन्य' (The Other) की अवधारणा के माध्यम से किस प्रकार उपनिवेशित समाजों की पहचान, भाषा और संस्कृति को नियंत्रित किया।
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Pages:61-63
How to cite this article:
आकिब जावेद "उत्तर औपनिवेशिक अध्ययन". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 4, 2025, Pages 61-63
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