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VOL. 11, ISSUE 4 (2025)
वेदभाष्य परम्परा में सायणाचार्य का स्थान
Authors
डॉ. सीमा राणी रथ
Abstract
सायणाचार्य भारतीय वैदिक परम्परा के ऐसे अद्वितीय मनीषी हैं जिन्होंने चारों वेदों का विस्तृत भाष्य कर भारतीय अध्यात्म, धर्म और संस्कृति की प्राचीन जड़ों को पुनर्जीवित किया। 14वीं शताब्दी के विजयनगर साम्राज्य के इस महान विद्वान ने वैदिक ज्ञान के गूढ़ मन्त्रार्थ को तर्क, मीमांसा, व्याकरण और निरुक्त के आधार पर स्पष्ट किया। सायणाचार्य का योगदान केवल भाष्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके द्वारा सम्पूर्ण वैदिक परम्परा को सामाजिक, नैतिक और धार्मिक पुनर्जागरण के एक माध्यम के रूप में पुनर्स्थापित किया गया। उनके भाष्य में यज्ञप्रधान दृष्टिकोण, शब्दार्थ की सूक्ष्मता, और सांस्कृतिक समन्वय की भावना स्पष्ट रूप से झलकती है। आज भी सायणभाष्य वेद-अध्ययन की अनिवार्य आधारशिला मानी जाती है, जिस पर आधुनिक वैदिक शोध की नींव टिकी है।
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Pages:82-87
How to cite this article:
डॉ. सीमा राणी रथ "वेदभाष्य परम्परा में सायणाचार्य का स्थान". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 4, 2025, Pages 82-87
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