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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 11, ISSUE 4 (2025)
हिंदी और भारतीय ज्ञान परंपराएँ: एक ऐतिहासिक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य
Authors
प्रो. डॉ. देवानंदन के वी
Abstract
यह आलेख विभिन्न ऐतिहासिक कालों में भारतीय ज्ञान परंपराओं के निर्माण और प्रसार में हिंदी भाषा और साहित्य की भूमिका का विश्लेषण करता है। अपभ्रंश से लेकर समकालीन साहित्य तक, हिंदी न केवल संप्रेषण का माध्यम रही है, बल्कि वह ज्ञानमीमांसा, नैतिकता और सांस्कृतिक मूल्यों की सामाजिक-सांस्कृतिक निधि भी रही है। यह अध्ययन भारत में भाषा, साहित्य और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों की परस्पर गतिशीलता की पड़ताल करता है, साथ ही हिंदी के शैक्षिक विकास, सामाजिक परिवर्तन, और सांस्कृतिक निरंतरता में योगदान को रेखांकित करता है। यह शोध ऐतिहासिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोणों से हिंदी की भूमिका को भारतीय बौद्धिक परंपरा के संरक्षण और पुनरुद्धार में केंद्रीय सिद्ध करने का प्रयास करता है।
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Pages:68-69
How to cite this article:
प्रो. डॉ. देवानंदन के वी "हिंदी और भारतीय ज्ञान परंपराएँ: एक ऐतिहासिक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 4, 2025, Pages 68-69
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