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VOL. 11, ISSUE 4 (2025)
विसंगतियों के दायरे में वृद्ध और देवेश ठाकुर की कहानियाँ
Authors
डॉ. राम बिनोद रे
Abstract
उत्तरआधुनिक
युग मरीन वैचारिक चेतना के प्रवाह ने
पारंपरिक और प्रगतिशील विचारों ने दुनिया को झकझोर दिया है, जिसमें स्त्री,
बच्चे, वृद्ध, दलित आदिवासी समाज की
घुटन ने एक अन्वेषन के राह को पकड़ा है। बदलते अन्वेषणात्मक चिंतन ने साहित्य को
प्रभावित किया है। औद्योगिक जगत और उपनिवेशवादी चिंतन के इस परिवेश ने मानवीय
सम्बन्धों के घुटन को सामने रखा है। व्यक्ति वस्तु का पराया हो गया है। हृदय के
स्थान पर बुद्धि ने ग्रहण कर लिया है। संस्कृति का विकृत रूप ने वृद्धों के प्रति
नजरिया बदला है। भारतीय सांस्कृतिक समाज को बदलकर उपेक्षित समाज में बादल दिया है।
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Pages:96-98
How to cite this article:
डॉ. राम बिनोद रे "विसंगतियों के दायरे में वृद्ध और देवेश ठाकुर की कहानियाँ ". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 4, 2025, Pages 96-98
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