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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 11, ISSUE 4 (2025)
कैलाश बनवासी की कहानियों में स्त्री जीवन
Authors
डॉ.जयपाल सिंह प्रजापति, दुर्गेश कुमार टंडन
Abstract
साहित्य जगत में स्त्री जीवन का चित्रण एक महत्वपूर्ण विषय रहा है, जिसमें समय के साथ स्त्री की भूमिका, संघर्ष, जिम्मेदारी और बदलते सामाजिक दृष्टिकोण स्पष्ट दिखाई देते हैं। समकालीन हिंदी कथा साहित्य में कथाकार कैलाश बनवासी ने स्त्री जीवन को अत्यंत यथार्थवादी, संवेदनशील एवं मानवीय दृष्टि से प्रस्तुत किया है। उनकी कहानियों में स्त्री केवल घरेलू दायित्वों तक सीमित न होकर सामाजिक, आर्थिक और भावनात्मक स्तर पर संघर्षरत दिखाई देती है। बनवासी की कहानियों में स्त्रियाँ पुरुष प्रधान समाज में शोषण, अपमान, आर्थिक असमानता, कार्यस्थल पर उत्पीड़न और सामाजिक बंधनों से जूझते हुए भी साहस, आत्मसम्मान, त्याग और आत्मनिर्णय की भावना के साथ उभरती हैं। उनकी कहानियों में सरला, रणवीर, जमुना, जया की माँ, शीला, गोमती, डॉली जैसी पात्राएँ समाज में स्त्री के बहुआयामी संघर्ष और अस्तित्व की जद्दोजहद को उजागर करती हैं।
कथाकार ने पारिवारिक संबंधों, कार्यस्थल के अनुभवों, दकियानूसी परंपराओं, आर्थिक निर्भरता और सामाजिक मानसिकता के माध्यम से स्त्री जीवन की विडंबनाओं का यथार्थ अंकन किया है। इसके साथ ही उनकी कहानियाँ स्त्री को केवल पीड़िता के रूप में नहीं, बल्कि संघर्षशील, निर्णय क्षमता वाली और आत्मसम्मान की रक्षा हेतु खड़ी होने वाली चेतन शक्तियों के रूप में भी प्रस्तुत करती हैं।

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Pages:114-116
How to cite this article:
डॉ.जयपाल सिंह प्रजापति, दुर्गेश कुमार टंडन "कैलाश बनवासी की कहानियों में स्त्री जीवन". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 4, 2025, Pages 114-116
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