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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 11, ISSUE 4 (2025)
शिक्षा में हिन्दी का उपयोग और उसके प्रभाव
Authors
डॉ0 अनुराग मिश्रा, अविनाश पाण्डेय
Abstract
किसी भी भाषा के लुप्त होने या उसके संकटग्रस्त श्रेणी में आ जाने के परिणाम बहुत दूरगामी होते हैं। भाषा का एक-एक शब्द महत्वपूर्ण होता है। प्रत्येक शब्द अपने पीछे संस्कृति की एक लंबी परंपरा को लेकर चलता है। इसलिए भाषा लुप्त होते ही संस्कृति पर खतरा मंडराने लगता है। संस्कृति और भाषा के संचित ज्ञान को बचाने के लिए भाषा के संरक्षण की बहुत आवश्यकता है। भारत की नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 में इस बात पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया है कि दुर्भाग्य से भारतीय भाषाओं को समुचित ध्यान और देखभाल नहीं मिल पायी है, जिसके तहत देश ने विगत 50 वर्षों में 220 भाषाओं को खो दिया है। देश में इन समृद्ध भाषाओं, संस्कृति की अभिव्यक्ति को संरक्षित या उन्हें रिकार्ड करने के लिए कोई ठोस नीति अभी तक नहीं थी। नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति में सभी भारतीय भाषाओं विशेषकर मातृभाषाओं या स्थानीय भाषाओं को प्राथमिक स्तर पर अनिवार्य शिक्षा का माध्यम और उसके आगे यथासंभव भारतीय भाषाओं को शिक्षा का माध्यम बनाए जाने की बात कही गयी है। भारतीय भाषाओं के संरक्षण के लिए यह एक बहुत बड़ा कदम है। इस कार्य के लिए अनेक अकादमी व संस्थान भी खोले जाने की घोषणा की गयी है। इन नीति में भारत की सभी भाषाओं के साथ संतुलन बनाने की कोशिश की गयी है। इस नीति में यह भी कहा गया है कि दुनियां भर के विकसित देशों में अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं में शिक्षित होना कोई बाधा नहीं है और इसका भरपूर लाभ उन्हें मिलता है, जबकि भारत में अभी भी यह बहुत मुश्किल कार्य है।
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Pages:155-157
How to cite this article:
डॉ0 अनुराग मिश्रा, अविनाश पाण्डेय "शिक्षा में हिन्दी का उपयोग और उसके प्रभाव". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 4, 2025, Pages 155-157
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