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VOL. 11, ISSUE 4 (2025)
गोस्वामी तुलसीदास के ‘रामचरितमानस’ में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समन्वय
Authors
प्रभात मिश्रा
Abstract
भारतीय साहित्य की अमर कृति ‘रामचरितमानस’ न केवल एक श्रेष्ठ धार्मिक ग्रन्थ है, अपितु एक सशक्त साहित्यिक एवं सांस्कृतिक दस्तावेज भी है। गोस्वामी तुलसीदास ने इसमें वैदिक-पौराणिक परम्परा, लोक-मान्यताओं, दार्शनिक चिंतन और समकालीन सामाजिक यथार्थ का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत किया है। यह शोधपत्र ‘मानस’ के उन्हीं साहित्यिक सौन्दर्य और सांस्कृतिक समन्वयवादी स्वरूप का विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जिसने इसे जन-जन की आस्था का केन्द्र बना दिया।
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Pages:138-139
How to cite this article:
प्रभात मिश्रा "गोस्वामी तुलसीदास के ‘रामचरितमानस’ में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समन्वय". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 4, 2025, Pages 138-139
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