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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 11, ISSUE 4 (2025)
बदलते परिवेश में हिन्दी कहानी और आधुनिक जीवन-मूल्यों का ह्रास: एक अध्ययन
Authors
आतिरा एम
Abstract
यह शोध-पत्र समकालीन हिन्दी कहानियों के विश्लेषण के माध्यम से हमारे जीवन में आई आधुनिकता के बहुआयामी प्रभावों और उससे उत्पन्न संवेदना, मूल्य तथा मानवता के ह्रास के बारे में चर्चा करता है।
'शवयात्रा', 'डोमिन काकी', 'नो बार', 'आर्द्रा', 'परदेसी', 'पतझड़ की आवाज़', 'मानवता और रसगुल्ले', 'उसकी गिरफ़्तारी से पूर्व', 'मैकडॉनल्ड', 'कॉर्न सूप', 'प्रोग्रामिंग', 'उपग्रह में' और 'निद्राखोर' आदि कुछ कहानियों के माध्यम से पूंजीवादी बाज़ार का दबाव, जातिगत रूढ़ियों का प्रभाव, तकनीकी प्रगति का नकारात्मक पक्ष और पारिवारिक विघटन जैसी समस्याओं का उद्घाटन करने का प्रयास हुआ है। यह लोगों को यह चेतावनी देने का भी प्रयास करता है कि भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे भागकर हम मानवीय सहजता खोकर रिक्तता को जन्म दे रहे हैं। इसी रिक्तता के विरुद्ध हमें लड़ना होगा और मानवता का पुनर्स्थापन करना होगा।

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Pages:140-144
How to cite this article:
आतिरा एम "बदलते परिवेश में हिन्दी कहानी और आधुनिक जीवन-मूल्यों का ह्रास: एक अध्ययन". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 4, 2025, Pages 140-144
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