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VOL. 11, ISSUE 4 (2025)
विद्यालयी वातावरण का माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की अभिरुचियों के विकास पर प्रभाव: एक तुलनात्मक विश्लेषण
Authors
प्रीति सागर, डॉ. प्रीति शर्मा
Abstract
विद्यालयी वातावरण विद्यार्थियों के संज्ञानात्मक, सामाजिक और भावनात्मक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विशेषकर माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की अभिरुचियों का विकास उनके सीखने की प्रेरणा, रचनात्मकता और शैक्षिक उपलब्धियों पर गहरा प्रभाव डालता है। वर्तमान अध्ययन का उद्देश्य यह निर्धारित करना है कि विभिन्न प्रकार के विद्यालयी वातावरण—जैसे शैक्षिक, सामाजिक और भौतिक वातावरण—माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की अभिरुचियों के विकास पर किस प्रकार प्रभाव डालते हैं।
अध्ययन में तुलनात्मक विश्लेषण के माध्यम से विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों की अभिरुचियों की तुलना की गई। इसके लिए चयनित माध्यमिक विद्यालयों के 300 विद्यार्थियों (कक्षा 9–12) को शामिल किया गया। डेटा संग्रह हेतु संरचित प्रश्नावली, साक्षात्कार और पर्यवेक्षण तकनीकों का उपयोग किया गया। प्रश्नावली में शैक्षिक गतिविधियों, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों, सहायक संसाधनों और शिक्षक समर्थन से संबंधित पहलुओं का मूल्यांकन किया गया।
अध्ययन के परिणाम बताते हैं कि सकारात्मक और सहायक विद्यालयी वातावरण वाले विद्यालयों में विद्यार्थियों की अभिरुचियाँ अधिक विकसित होती हैं। विशेष रूप से सह-पाठ्यक्रम गतिविधियाँ, लाइब्रेरी और प्रयोगशालाओं की उपलब्धता तथा शिक्षकों की प्रेरक भूमिका विद्यार्थियों की अभिरुचियों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण पाई गई। इसके विपरीत, असंतुलित और सीमित संसाधनों वाले विद्यालयों में विद्यार्थियों की अभिरुचियाँ अपेक्षाकृत कम विकसित पाई गई।
अध्ययन का निष्कर्ष यह है कि विद्यालयी वातावरण केवल अकादमिक शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों के समग्र विकास, आत्मविश्वास और सृजनात्मक क्षमता को भी प्रभावित करता है। शोध के निष्कर्ष नीति निर्धारकों, शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करते हैं ताकि वे विद्यार्थियों की अभिरुचियों के विकास हेतु अनुकूल वातावरण सुनिश्चित कर सकें।
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Pages:166-168
How to cite this article:
प्रीति सागर, डॉ. प्रीति शर्मा "विद्यालयी वातावरण का माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की अभिरुचियों के विकास पर प्रभाव: एक तुलनात्मक विश्लेषण". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 4, 2025, Pages 166-168
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