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VOL. 11, ISSUE 4 (2025)
प्रेमचन्द और दलित वर्ग की कठिनाईयां एवं दलित मनोवृत्ति
Authors
लालचंद, डॉ. अशोक धारनिया
Abstract
प्रेमचन्द की सामाजिक दृष्टि और उनके साहित्य में दलित जीवन के चित्रण का गहन विश्लेषण प्रस्तुत होता है। प्रेमचन्द ने दलित वर्ग को केवल करुणा और दया के विषय के रूप में नहीं, बल्कि संघर्षशील, संवेदनशील और आत्मसम्मान से युक्त मानव के रूप में चित्रित किया। उनके साहित्य में जातिगत अन्याय, आर्थिक विषमता, सामाजिक बहिष्कार और मानवीय गरिमा के हनन की समस्याएँ यथार्थपरक रूप में सामने आती हैं। दलित मनोवृत्ति की सैद्धान्तिक व्याख्या करते हुए यह स्पष्ट होता है कि निरंतर शोषण के बावजूद दलित पात्रों में आत्मचेतना और प्रतिरोध की भावना विद्यमान है। प्रेमचन्द की दृष्टि मानवीय समानता और सामाजिक न्याय पर आधारित है, जो उनके रचनात्मक उद्देश्य को स्पष्ट करती है।
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Pages:169-170
How to cite this article:
लालचंद, डॉ. अशोक धारनिया "प्रेमचन्द और दलित वर्ग की कठिनाईयां एवं दलित मनोवृत्ति". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 4, 2025, Pages 169-170
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