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VOL. 11, ISSUE 4 (2025)
वैदिक साहित्य में प्रकृति-पूजा और पर्यावरण संरक्षण की दार्शनिक आधारभूमि
Authors
बेअन्त कौर, डॉ. सुनीता स्वामी
Abstract
वैदिक साहित्य में प्रकृति-पूजा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि एक गहन दार्शनिक एवं पर्यावरणीय दृष्टि का प्रतीक है। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद में पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश को दिव्य सत्ता के रूप में स्वीकार कर मानव और प्रकृति के बीच सहअस्तित्व की भावना विकसित की गई। ‘ऋत’ की अवधारणा ब्रह्मांडीय संतुलन और नैतिक अनुशासन का आधार प्रस्तुत करती है। यज्ञ, वन-संस्कृति, औषधि-सम्मान तथा संयमित उपभोग की परंपराएँ पर्यावरण संरक्षण की स्पष्ट चेतना दर्शाती हैं। यह अध्ययन प्रतिपादित करता है कि वैदिक दृष्टिकोण आधुनिक पर्यावरण संकट के समाधान हेतु महत्वपूर्ण दार्शनिक आधार प्रदान करता है।
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Pages:173-174
How to cite this article:
बेअन्त कौर, डॉ. सुनीता स्वामी "वैदिक साहित्य में प्रकृति-पूजा और पर्यावरण संरक्षण की दार्शनिक आधारभूमि". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 4, 2025, Pages 173-174
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