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VOL. 11, ISSUE 4 (2025)
महात्मा गांधी की विचारधारा के निर्माण में अध्ययन एवं पठन-संस्कृति का योगदान
Authors
पल्लवी आनंद
Abstract
‘महात्मा गांधी की विचारधारा के निर्माण में अध्ययन एवं पठन-संस्कृति का योगदान’ विषय के अंतर्गत उनके विचारधारा के निर्माण में उपयुक्त पुस्तकों का विवरणात्मक अध्ययन किया गया है। किसी भी विचारधारा को समझने, किसी सिद्धांत की गहराई तक पहुँचने, समाज की संरचना का विश्लेषण करने अथवा किसी दृष्टिकोण का निर्माण करने के लिए अध्ययन सबसे महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। अध्ययन ही मनुष्य के विचारों को दिशा देता है, उसके चिंतन को व्यापक बनाता है तथा उसे आत्ममंथन के लिए प्रेरित करता है। महात्मा गांधी इसका एक अत्यंत सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। गांधी का व्यक्तित्व अचानक निर्मित नहीं हुआ था, उनके निरंतर अध्ययन, आत्मचिंतन और विविध वैचारिक स्रोतों के संपर्क का परिणाम था। अपने जीवन के प्रारंभिक चरण से लेकर अंतिम समय तक गांधी निरंतर पठन-पाठन और अध्ययन से जुड़े रहे। उन्होंने धार्मिक ग्रंथों, दार्शनिक विचारों, सामाजिक साहित्य तथा विभिन्न चिंतकों के लेखन का गंभीर अध्ययन किया। यही अध्ययन उनके व्यक्तित्व, विचारधारा और जीवन-दृष्टि के निर्माण का आधार बना। गांधी के अध्ययन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि वे केवल ज्ञान अर्जित करने के उद्देश्य से नहीं पढ़ते थे। वे जिन विचारों, सिद्धांतों और जीवन-मूल्यों को पढ़ते थे, उन्हें अपने जीवन में परखने और व्यवहार में उतारने का प्रयास भी करते थे।
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Pages:175-177
How to cite this article:
पल्लवी आनंद "महात्मा गांधी की विचारधारा के निर्माण में अध्ययन एवं पठन-संस्कृति का योगदान". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 4, 2025, Pages 175-177
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