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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
सुधा मूर्ति के साहित्य में भारतीय ज्ञान परंपरा: पौराणिकता, आधुनिकता और सामाजिक मूल्य का समन्वय
Authors
शिखा राय
Abstract
सुधा मूर्ति, भारतीय साहित्य की एक प्रतिष्ठित साहित्यकार, ने अपने साहित्य के माध्यम से समकालीन भारतीय समाज के सामाजिक एवं सांस्कृतिक विमर्श को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया है। उनकी लेखनी, जो संवेदनशीलता एवं सूझबूझ से परिपूर्ण है, भारतीय समाज की बहुस्तरीय जटिलताओं को गहराई से उद्घाटित करती है। उनकी प्रसिद्ध कृति "महाश्वेता" में वे सामाजिक भेदभाव और वर्गभेद जैसे विषयों को प्रभावशाली ढंग से उभारते हुए हाशिए पर स्थित समुदायों की आवाज़ को साहित्यिक मंच प्रदान करती हैं। सुधा मूर्ति का साहित्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक आत्ममंथन का माध्यम है। वे अपने पाठकों को लैंगिक असमानता, बाल विवाह, तथा परंपरा और आधुनिकता के अंतर्विरोध जैसे विषयों पर विचार करने को प्रेरित करती हैं। उनके कथानकों में पौराणिकता, लोककथाएँ और भारतीय संस्कृति की गूढ़ आत्मा सहजता से समाहित होती है, जिससे उनके साहित्य को एक विशिष्ट सांस्कृतिक गहराई प्राप्त होती है। उनके पात्रों का सहानुभूतिपूर्ण चित्रण सामाजिक बंधनों के प्रति गहरी समझ को दर्शाता है। यह शोधपत्र सुधा मूर्ति के साहित्य में पौराणिकता और आधुनिकता के समन्वय की विशिष्टता का समीक्षात्मक अध्ययन करता है, तथा समकालीन भारतीय साहित्य में उनके योगदान को रेखांकित करता है।
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Pages:8-11
How to cite this article:
शिखा राय "सुधा मूर्ति के साहित्य में भारतीय ज्ञान परंपरा: पौराणिकता, आधुनिकता और सामाजिक मूल्य का समन्वय". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 8-11
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