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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
मणिपुरी साहित्य में पुनर्जागरण (Renaissance)
Authors
चान्दम ओकेनजित सिंह
Abstract
यह आलेख मणिपुरी साहित्य में 20वीं शताब्दी के आरम्भ में आए पुनर्जागरण पर केंद्रित है। 1891 में अंग्रेज़ी शासन के बाद मणिपुर के सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षिक जीवन में बड़े परिवर्तन हुए। पश्चिमी शिक्षा के आगमन से लोगों में नई चेतना और जागरूकता आई, जिससे जनआंदोलन और सामाजिक परिवर्तन संभव हुए।
नई शिक्षा नीति ने मणिपुरी भाषा और साहित्य के विकास को गति दी। प्रारम्भ में शिक्षा का माध्यम बंगाली था, पर बाद में मणिपुरी भाषा में पाठ्य-पुस्तकें और साहित्य रचना शुरू हुई। अनेक लेखकों और पत्रिकाओं ने आधुनिक मणिपुरी साहित्य की नींव रखी।
इस प्रकार यह काल मणिपुरी साहित्य का पुनर्जागरण युग माना जाता है, जिसमें नई सोच, मातृभाषा प्रेम और आधुनिक साहित्यिक रूपों का विकास हुआ।
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Pages:12-14
How to cite this article:
चान्दम ओकेनजित सिंह "मणिपुरी साहित्य में पुनर्जागरण (Renaissance)". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 12-14
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