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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
निर्मल वर्मा के कथा-साहित्य में आधुनिक बोध और अस्तित्वगत चेतना का विकास
Authors
सुकेश कुमार पचौरी, डॉ० सुधीर कुमार गौतम
Abstract
निर्मल वर्मा हिन्दी साहित्य के उन विरल कथाकारों में हैं जिन्होंने आधुनिक मनुष्य की आंतरिक विडंबना, अस्तित्वगत संकट, सांस्कृतिक विस्थापन और स्मृति-बोध को अभूतपूर्व संवेदनशीलता और कलात्मक परिपक्वता के साथ अभिव्यक्त किया। उनका कथा-साहित्य पारंपरिक यथार्थवादी कथा-ढाँचे से मुक्त होकर मनोवैज्ञानिक यथार्थ, आंतरिक संवेदना, मौन के सौंदर्यशास्त्र और अस्तित्वगत आत्मसंघर्ष को केंद्र में रखता है। प्रस्तुत शोध-पत्र में 1959 से 1995 तक के उनके साहित्यिक विकास को पाँच सुस्पष्ट चरणों में विभाजित कर उनके कथा-शिल्प, विषयवस्तु, दार्शनिक दृष्टि तथा भाषिक प्रयोगों का समग्र विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। यह अध्ययन यह प्रतिपादित करता है कि निर्मल वर्मा का साहित्य न केवल 'नई कहानी आंदोलन' का प्रतिनिधित्व करता है, बल्कि भारतीय आधुनिकता और पश्चिमी अस्तित्ववाद के बीच एक अनूठा संवाद स्थापित करता है।
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Pages:41-44
How to cite this article:
सुकेश कुमार पचौरी, डॉ० सुधीर कुमार गौतम "निर्मल वर्मा के कथा-साहित्य में आधुनिक बोध और अस्तित्वगत चेतना का विकास". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 41-44
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